Sbg 6.20 scjaya
Sanskrit Commentary By Sri Jayatritha ।।6.20।।यत्र चैवात्मना इत्यत्र पदत्रयं व्याख्याति आत्मने ति। अन्वयापेक्षया व्युत्क्रमः। पश्यन्निति स्थानविवेकार्थमुक्तम्।
Sanskrit Commentary By Sri Jayatritha ।।6.20।।यत्र चैवात्मना इत्यत्र पदत्रयं व्याख्याति आत्मने ति। अन्वयापेक्षया व्युत्क्रमः। पश्यन्निति स्थानविवेकार्थमुक्तम्।