Sbg 6.15 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।6.15।।अब योगका फल कहा जाता है नियत मनवाला योगी अर्थात् जिसका मन जीता हुआ है ऐसा योगी उपर्युक्त प्रकारसे सदा आत्माका समाधान करता हुआ अर्थात् मनको परमात्मामें स्थिर करताकरता मुझमें स्थित निर्वाणदायिनी शान्तिको उपरतिको पाता है अर्थात् जिस शान्तिकी परमनिष्ठा अन्तिम स्थिति मोक्ष है एवं जो मुझमें स्थित है मेरे अधीन है ऐसी शान्तिको प्राप्त होता है।