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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।5.10।।परंतु जो तत्त्वज्ञानी नहीं है और कर्मयोगमें लगा हुआ है ( यानी ) जो स्वामीके लिये कर्म करनेवाले नौकरकी भाँति मैं ईश्वरके लिये करता हूँ इस भावसे सब कर्मोंको ईश्वरमें अर्पण करके यहाँतक कि मोक्षरूप फलकी भी आसक्ति छोड़कर कर्म करता है। वह जैसे कमलका पत्ता जलमें रहकर भी उससे लिप्त नहीं होता वैसे ही पापोंसे लिप्त नहीं होता।