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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।4.16।।यदि कर्म ही कर्तव्य है तो मैं आपकी आज्ञासे ही करनेको तैयार हूँ फिर पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् विशेषण देनेकी क्या आवश्यकता है इसपर कहते हैं कि कर्मके विषयमें बड़ी भारी विषमता है अर्थात् कर्मका विषय बड़ा गहन है। सो किस प्रकार कर्म क्या है और अकर्म क्या है इस कर्मादिके विषयमें बड़ेबड़े बुद्धिमान् भी मोहित हो चुके हैं इसलिये मैं तुझे वह कर्म और अकर्म बतलाऊँगा जिस कर्मादिको जानकर तू अशुभसे यानी संसारसे मुक्त हो जायगा।