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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।4.10।।यह मोक्षमार्ग अभी आरम्भ हुआ है ऐसी बात नहीं किंतु पहले भी जिनके राग भय और क्रोध चले गये हैं ऐसे रागादि दोषोंसे रहित ईश्वरमें तन्मय हुए ईश्वरसे अपना अभेद समझनेवाले ब्रह्मवेत्ता और मुझ परमेश्वरके ही आश्रित केवल ज्ञाननिष्ठामें स्थित ऐसे बहुतसे महापुरुष परमात्मविषयक ज्ञानरूप तपसे परमशुद्धिको प्राप्त होकर मुझ ईश्वरके भावको मोक्षको प्राप्त हो गये हैं। ज्ञानतपसा यह विशेषण इस बातका द्योतक है कि ज्ञाननिष्ठा अन्य तपोंकी अपेक्षा नहीं रखती।