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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।4.7।।वह जन्म कब और किसलिये होता है सो कहते हैं हे भारत वर्णाश्रम आदि जिसके लक्षण हैं एवं प्राणियोंकी उन्नति और परम कल्याणका जो साधन है उस धर्मकी जबजब हानि होती है और अधर्मका अभ्युत्थान अर्थात् उन्नति होती है तबतब ही मैं मायासे अपने स्वरूपको रचता हूँ।