Sbg 4.6 htshg

From IKS BHU
Revision as of 17:50, 3 December 2025 by imported>Vij (Added {content_identifier} content)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।4.6।।तो फिर आप नित्य ईश्वरका पुण्यपापसे सम्बन्ध न होनेपर भी जन्म कैसे होता है इसपर कहा जाता है यद्यपि मैं अजन्मा जन्मरहित अव्ययात्मा अक्षीण ज्ञानशक्तिस्वभाववाला और ब्रह्मासे लेकर स्तम्बपर्यन्त सम्पूर्ण भूतोंका नियमन करनेवाला ईश्वर भी हूँ तो भी अपनी त्रिगुणात्मिका वैष्णवी मायाको जिसके वशमें सब जगत् बर्तता है और जिससे मोहित हुआ मनुष्य वासुदेवरूप अपनेआपको नहीं जानता उस अपनी प्रकृतिको अपने वशमें रखकर केवल अपनी लीलासे ही शरीरवालासा जन्म लिया हुआसा हो जाता हूँ अन्य लोगोंकी भाँति वास्तवमें जन्म नहीं लेता।