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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।3.37।।यह काम जो सब लोगोंका शत्रु है जिसके निमित्तसे जीवोंको सब अनर्थोंकी प्राप्ति होती है वहीं यह काम किसी कारणसे बाधित होनेपर क्रोधके रूपमें बदल जाता है इसलिये क्रोध भी यही है। यह काम रजोगुणसे उत्पन्न हुआ है अथवा यों समझो कि रजोगुणका उत्पादक है क्योंकि उत्पन्न हुआ काम ही रजोगुणको प्रकट करके पुरुषको कर्ममें लगाया करता है। तथा रजोगुणके कार्य सेवा आदिमें लगे हुए दुःखित मनुष्योंका ही यह प्रलाप सुना जाता है कि तृष्णा ही हमसे अमुक काम करवाती है इत्यादि। तथा यह काम बहुत खानेवाला है। इसलिये महापापी भी है क्योंकि कामसे ही प्रेरित हुआ जीव पाप किया करता है। इसलिये इस कामको ही तू इस संसारमें वैरी जान।