Sbg 3.31 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।3.31।।कर्म करने चाहिये ऐसा जो यह मत प्रमाणसहित कहा गया वह यथार्थ है ( ऐसा मानकर ) जो श्रद्धायुक्त मनुष्य गुरुस्वरूप मुझ वासुदेवमें असूया न करते हुए ( मेरे गुणोंमें दोष न देखते हुए ) मेरे इस मतके अनुसार चलते हैं वे ऐसे मनुष्य भी पुण्यपापरूप कर्मोंसे मुक्त हो जाते हैं।