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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।3.28।।परंतु जो ज्ञानी है हे महाबाहो वह तत्त्ववेत्ता किसका तत्त्ववेत्ता गुणकर्मविभागका अर्थात् गुणविभाग और कर्मविभागके तत्त्वको जाननेवाला ज्ञानी इन्द्रियादिरूप गुण ही विषयरूप गुणोंमें बर्त रहे हैं आत्मा नहीं बर्तता ऐसे मानकर आसक्त नहीं होता। उन कर्मोंमें प्रीति नहीं करता।