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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।3.10।।इस आगे बतलाये जानेवाले कारणसे भी अधिकारीको कर्म करना चाहिये सृष्टिके आदिकालमें यज्ञसहित प्रजाको अर्थात् ( ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य इन ) तीनों वर्णोंको रचकर जगत्के रचयिता प्रजापतिने कहा कि इस यज्ञसे तुमलोग प्रसवउत्पत्ति यानी वृद्धिलाभ करो। यह यज्ञतुमलोगोंको इष्ट कामनाओंका देनेवाला अर्थात् इच्छित फलरूप नाना भोगोंको देनेवाला हो।