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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।3.8।।ऐसा होनेके कारण हे अर्जुन जो कर्म श्रुतिमें किसी फलके लिये नहीं बताया गया है ऐसे जिस कर्मका जो अधिकारी है उसके लिये वह नियत कर्म है उस नियत अर्थात् नित्य कर्मका तू आचरण कर क्योंकि कर्मोंके न करनेकी अपेक्षा कर्म करना परिणाममें बहुत श्रेष्ठ है। क्योंकि कुछ भी न करनेसे तो तेरी शरीरयात्रा भी नहीं चलेगी अर्थात् तेरे शरीरका निर्वाह भी नहीं होगा। इसलिये कर्म करने और न करनेमें जो अन्तर है वह संसारमें प्रत्यक्ष है।