Sbg 2.30 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।2.30।।अब यहाँ प्रकरणके विषयका उपसंहार करते हुए कहते हैं
यह जीवात्मा सर्वव्यापी होनेके कारण सबके स्थावरजंगम आदि शरीरोंमें स्थित है तो भी अवयवरहित और नित्य होनेके कारण सदा सब अवस्थाओंमें अवश्य ही है।
जिससे कि सम्पूर्ण प्राणियोंके शरीरोंका नाश किये जानेपर भी इस आत्माका नाश नहीं किया जा सकता इसलिये भीष्मादि सब प्राणियोंके उद्देश्यसे तुझे शोक करना उचित नहीं है।