Sbg 2.22 scsri
Sanskrit Commentary By Sri Sridhara Swami ।।2.22।। नन्वात्मनोऽविनाशित्वेऽपि तदीयशरीरनाशं पर्यालोच्य शोचामीति चेत्तत्राह वासांसीति। कर्मनिबन्धनभूतानां देहानामवश्यंभावित्वान्न जीर्णदेहनाशे शोकावकाश इत्यर्थः।
Sanskrit Commentary By Sri Sridhara Swami ।।2.22।। नन्वात्मनोऽविनाशित्वेऽपि तदीयशरीरनाशं पर्यालोच्य शोचामीति चेत्तत्राह वासांसीति। कर्मनिबन्धनभूतानां देहानामवश्यंभावित्वान्न जीर्णदेहनाशे शोकावकाश इत्यर्थः।