Sbg 2.18 scang
Sanskrit Commentary By Sri Abhinavgupta ।।2.18।।यस्तत्त्वदर्शिभिर्दृष्टः स खलु नित्योऽनित्यो वा इत्याशङ्क्याह
अविनाशि इति। तुश्चार्थे। आत्मा त्वविनाशी।
Sanskrit Commentary By Sri Abhinavgupta ।।2.18।।यस्तत्त्वदर्शिभिर्दृष्टः स खलु नित्योऽनित्यो वा इत्याशङ्क्याह
अविनाशि इति। तुश्चार्थे। आत्मा त्वविनाशी।