Sbg 2.17 scsri
Sanskrit Commentary By Sri Sridhara Swami ।।2.17।।तत्र सत्स्वभावमविनाशि वस्तु सामान्येनोक्तं विशेषतो दर्शयति अविनाशीति। येन सर्वमिदमागमापायधर्मकं देहादिततं तत्साक्षित्वेन व्याप्तम्। तत्तु आत्मस्वरूपमविनाशि विनाशशून्यं विद्धि जानीहि। तत्र हेतुमाह विनाशमिति।