2/1/10

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सूत्र

पश्चात् सिद्धौ न प्रमाणेभ्यः प्रमेयसिद्धिः 2/1/10


पदच्छेद

पश्चात्, सिद्धौ, न, प्रमाणेभ्यः, प्रमेयसिद्धिः ।


पदपदार्थ

संख्या पद अर्थ
1 पश्चात् प्रमेय पदार्थ के उत्तरकाल में
2 सिद्धौ प्रमाण की सत्ता मानने पर
3 नहीं होगी
4 प्रमाणेभ्यः प्रत्यक्षादि प्रमाणों से
5 प्रमेयसिद्धिः प्रमेय पदार्थ की सिद्धि (न होगी)

सूत्रकार

यदि पूर्वकाल में प्रमेय तथा उत्तरकाल में प्रमाण माना जाय, तो प्रमाण के न होने के कारण किससे जाना हुआ पदार्थ प्रमेय (जानने योग्य) है ऐसा सिद्ध होगा क्योंकि प्रत्यक्षादि प्रमाणों से जाना गया ही पदार्थ प्रमेय (जानने योग्य) है यह सिद्ध होता है, अतः प्रमाण प्रमेय पदार्थ के उत्तरकाल में भी नहीं माना जा सकता। (अर्थात् यद्यपि प्रमेयपदार्थ का स्वरूप प्रमाण के अधीन नहीं है तथापि उस पदार्थ में प्रमेयता (जानने की विषयता) प्रमाण के अधीन होने के कारण वह प्रमेय यदि प्रमाण के पूर्वकाल में हो तो उसमें प्रमाण के सम्बन्ध के कारण प्रमेयता न हो सकेगी यह पूर्वपक्षी के सूत्र का अर्थ है, अतः प्रमेय के उत्तरकाल में मी प्रमाण रहते हैं यह सिद्ध न हो सकेगा ।


भाष्यकार

(१० सूत्र को माष्यकार पूर्वपक्षों के मत से व्याख्या करते हैं कि) - प्रमेय के पूर्वकाल में प्रत्यक्षादि प्रमाण के न रहने पर किससे जाना गया पदार्थ 'प्रमेय' (जानने योग्य) है यह सिद्ध होगा। क्योंकि प्रमाण से जाना गया हुआ ही पदार्थ 'प्रमेय' (जानने योग्य) है यह सिद्ध हो सकता है।


भाषान्तर