Sbg 1.6 scsri
Sanskrit Commentary By Sri Sridhara Swami ।।1.6।। युधामन्युश्चेति। विक्रान्तो युधामन्युर्नामैकः। सौभद्रोऽभिमन्युः। द्रौपदेयाः द्रोपद्यां पञ्चभ्यो युधिष्ठिरादिभ्यो जाताः प्रतिविन्ध्यादयः पञ्च। महारथादीनां लक्षणम् एको दशसहस्त्राणि योधयेद्यस्तु धन्विनाम्। शस्त्रशास्त्रप्रवीणश्च महारथ इति स्मृतः।।अमितान्यो धयेद्यस्तु संप्रोक्तोऽतिरथस्तु सः। रथी त्वेकेन यो युद्ध्येत्तन्न्यूनोऽर्धरथी मतः।। इति।