Sbg 18.70 htshg

From IKS BHU
Revision as of 15:49, 4 December 2025 by imported>Vij (Added {content_identifier} content)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।18.70।।जो भी कोई --, जो मनुष्य? हम दोनोंके संवादरूप इस धर्मयुक्त गीताग्रन्थको पढ़ेगा? उसके द्वारा यह होगा कि मैं ज्ञानयज्ञसे ( पूजित होऊँगा )? विधियज्ञ? जपयज्ञ? उपांशुयज्ञ और मानसयज्ञ -- इन चार यज्ञोंमें ज्ञानयज्ञ मानस है इसलिये श्रेष्ठतम है। अतः उस ज्ञानयज्ञकी समानतासे गीताशास्त्रके अध्ययनकी स्तुति करते हैं। अथवा यों समझो कि यह फलविधि है यानी इसका फल देवतादिविषयक ज्ञानयज्ञके समान होता है। उस अध्ययनसे मैं ( ज्ञानयज्ञद्वारा ) पूजित होता हूँ? ऐसा मेरा निश्चय है।


,