Sbg 18.64 htshg

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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।18.64।।फिर भी मैं जो कुछ कहता हूँ उसे सुन --, सर्व गुह्योंमें अत्यन्त गुह्य -- रहस्ययुक्त मेरे परम उत्तम वचन तू फिर भी सुन अर्थात् जो वचन मैंने पहले अनेक बार कहे हैं उनको तू फिरसे सुन। मैं ( जो कुछ कहूँगा वह ) भयसे अथवा स्वार्थके लिये नहीं कहूँगा किंतु तू मेरा दृढ़ ऐकान्तिक प्रिय है? यह समझकर -- केवल इसी कारणसे तेरे हितकी बात अर्थात् परम ज्ञानप्राप्तिका साधन कहूँगा क्योंकि यही साधन सब हितोंमें उत्तम हित है।