Sbg 18.59 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।18.59।।तुझे यह भी नहीं समझना चाहिये कि मैं स्वतन्त्र हूँ? दूसरेका कहना क्यों करूँ --, जो तू अहंकारका आश्रय लेकर यह मान रहा है -- ऐसा निश्चय कर रहा है कि मैं युद्ध नहीं करूँगा सो यह तेरा निश्चय मिथ्या है क्योंकि तेरी प्रकृति -- तेरा क्षत्रियस्वभाव तुझे युद्धमें नियुक्त कर देगा।