Sbg 18.8 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।18.8।।तथा --, समस्त कर्म दुःखरूप हैं? ऐसा मानकर जो कोई शारीरिक क्लेशके भयसे कर्मोंको छोड़ बैठता है? वह,( ऐसा ) राजस त्याग करके? त्यागका फल अर्थात् ज्ञानपूर्वक किये हुए सर्वकर्मसंन्यासका मोक्षरूप फल? नहीं पाता।