Sbg 17.10 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।17.10।।यातयाम -- अधपका? गतरस -- रसरहित? पूति -- दुर्गन्धयुक्त और बासी अर्थात् जिसको पके हुए एक रात बीत गयी हो? तथा उच्छिष्ट -- खानेके पश्चात् बचा हुआ और अमेध्य -- जो यज्ञके योग्य न हो? ऐसा भोजन तामसी मनुष्योंको प्रिय होता है। यहाँ? यातयामका अर्थ अधपका किया गया है क्योंकि निर्वीर्य ( सारहीन भोजनको गतरस शब्दसे कहा गया है।