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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।16.14।।अमुक देवदत्त नामक दुर्जय शत्रु तो मेरे द्वारा मारा जा चुका? अब दूसरे पामर निर्बल शत्रुओंको भी मैं मार डालूँगा? यह बेचारे गरीब मेरा क्या करेंगे जो किसी तरह भी मेरे समान नहीं हैं। मैं ईश्वर हूँ? भोगी हूँ? सब प्रकारसे सिद्ध हूँ तथा पुत्रपौत्र और नातियोंसे सम्पन्न हूँ। मैं केवल साधारण मनुष्य ही नहीं हूँ? बल्कि बड़ा बलवान् और सुखी भी मैं ही हूँ? दूसरे सब तो भूमिपर भाररूप ही उत्पन्न हुए हैं।