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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।14.20।।कैसे प्राप्त होता है सो बतलाते हैं --, देहोत्पत्तिके बीजभूत? इन मायोपाधिक पूर्वोक्त तीनों गुणोंका उल्लंघन कर? अर्थात् जीवितावस्थामें ही इनका अतिक्रम करके? यह देहधारी विद्वान् जीता हुआ ही जन्म मृत्यु? बुढ़ापे और दुःखोंसे मुक्त होकर अमृतका अनुभव करता है। अभिप्राय यह कि इस प्रकार वह मेरे भावको प्राप्त हो जाता है।