Sbg 14.10 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।14.10।।ये तीनों गुण उपर्युक्त कार्य कब करते हैं सो कहते हैं --, हे भारत रजोगुण और तमोगुण -- इन दोनोंको दबाकर जब सत्त्वगुण उन्नत होता है -- बढ़ता है? तब वह अपने स्वरूपको प्राप्त हुआ सत्त्वगुण अपने कार्यज्ञान और सुखादिका आरम्भ किया करता है। तथा सत्त्वगुण और तमोगुण -- इन दोनोंको ही दबाकर जब रजोगुण बढ़ता है तब वह कर्मोंमें तृष्णा आदि अपने कार्यका आरम्भ किया करता है। वैसे ही सत्त्वगुण और रजोगुण इन दोनोंको दबाकर जब तम नामक गुण बढ़ता है तब वह ज्ञानको आच्छादित करना आदि अपना कार्य आरम्भ किया करता है।
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