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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।14.8।।और समस्त देहधारियोंको मोहित करनेवाले तमोगुणको? यानी जीवोंके अन्तःकरणमें मोह -- अविवेक उत्पन्न करनेवाले तम नामक तीसरे गुणको? तू अज्ञानसे उत्पन्न हुआ जान। हे भारत वह तमोगुण? ( जीवोंको ) प्रमाद? आलस्य और निद्राके द्वारा बाँधा करता है।