Sbg 14.3 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।14.3।।अब यह बतलाते हैं कि इस प्रकारका क्षेत्र और क्षेत्रज्ञका संयोग भूतोंका कारण है --, मुझ ईश्वरकी माया -- त्रिगुणमयी प्रकृति? समस्त भूतोंकी योनि अर्थात् कारण है। समस्त कार्योंसे यानी उत्पत्तिशील वस्तुओंसे बड़ी होनेके कारण और अपने विकारोंको धारण करनेवाली होनेसे प्रकृति ही महत् ब्रह्म इस विशेषणसे विशेषित की गयी है। उस महत् ब्रह्मरूप योनिमें? मैं -- क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ इन दो प्रकृतिरूप शक्तियोंवाला ईश्वर? हिरण्यगर्भके जन्मके बीजरूप गर्भको? यानी सब भूतोंकी उत्पत्तिके कारणरूप बीजको? स्थापित किया करता हूँ। अर्थात् अविद्या? कामना? कर्म और उपाधिके स्वरूपका अनुवर्तन करनेवाले क्षेत्रको क्षेत्रज्ञसे संयुक्त किया करता हूं। हे भारत उस गर्भाधानसे हिरण्यगर्भकी उत्पत्तिद्वारा समस्त भूतोंकी उत्पत्ति होती है।