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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।13.34।।तथा --, जैसे एक ही सूर्य इस समस्त लोकको प्रकाशित करता है? वैसे ही? महाभूतोंसे लेकर धृतिपर्यन्त बतलाये हुए समस्त क्षेत्रको वह एक होते हुए भी प्रकाशित करता है। कौन करता है क्षेत्रज्ञ -- परमात्मा। यहाँ आत्मामें सूर्यका दृष्टान्त दोनों प्रकारसे ही घटता है? आत्मा सूर्यकी भाँति समस्त शरीरोंमें एक है और अलिप्त भी है।