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साध्यसाधर्म्यात्तद्धर्मभावी दृष्टान्त उदाहरणम् 1/1/36


संधि विच्छेद:

  • साध्य + साधर्म्यात् + तद् + धर्म + भावी + दृष्टान्त + उदाहरणम्।

पदच्छेद और अर्थ:

  1. साध्य:
    • अर्थ: वह तथ्य जिसे सिद्ध करना है।
    • उदाहरण: "वह्निमान्" (आग होना)।
  2. साधर्म्यात्:
    • साधर्म्य (समानता) + आत् (पंचमी विभक्ति) = समानता के आधार पर।
    • अर्थ: समान गुणों के कारण।
  3. तद्:
    • अर्थ: उसका, अर्थात् साध्य का।
  4. धर्म:
    • अर्थ: गुण या विशेषता।
    • संदर्भ: साध्य के गुण।
  5. भावी:
    • अर्थ: उपस्थित, विद्यमान।
    • संदर्भ: ऐसा जो उस गुण को धारण करता हो।
  6. दृष्टान्त:
    • अर्थ: एक उदाहरण या प्रमाण।
    • संदर्भ: तर्क को स्पष्ट करने वाला दृष्टांत।
  7. उदाहरणम्:
    • अर्थ: दृष्टांत को समझाने वाला संदर्भ।
    • संदर्भ: प्रमाण के रूप में दिया गया दृष्टांत।

पूरा अर्थ:

"साध्यसाधर्म्यात्तद्धर्मभावी दृष्टान्त उदाहरणम्" का अर्थ है:

"साध्य (जिसे सिद्ध करना है) के समान धर्म (गुण) रखने वाला दृष्टांत, जो तर्क में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।"


व्याख्या:

न्याय दर्शन में, तर्क को प्रमाणित करने के लिए दृष्टांत (उदाहरण) का उपयोग किया जाता है।

  • यह दृष्टांत साध्य के समान गुण (साधर्म्य) रखने वाला होता है।
  • इसे स्पष्ट करने के लिए एक ऐसा संदर्भ दिया जाता है, जिसमें वही गुण उपस्थित हो जो साध्य में सिद्ध किया जाना है।

उदाहरण सहित विवरण:

तर्क: "पर्वतो वह्निमान् धूमवत्त्वात्।"

(पहाड़ में आग है क्योंकि वहाँ धुआँ है।)

  1. साध्य:
    • "वह्निमान्" (आग होना)।
  2. साधर्म्य:
    • आग और धुआँ का सह-अस्तित्व।
  3. दृष्टान्त (उदाहरण):
    • "यथा महात्मनो धूमवन्तः वह्निमन्तः।" (जैसे चूल्हे में धुआँ होता है और वहाँ आग होती है।)

यहाँ, चूल्हे का उदाहरण दृष्टान्त है क्योंकि यह साध्य (आग होना) और साधर्म्य (धुआँ और आग का सह-अस्तित्व) को स्पष्ट करता है।


महत्व:

  1. दृष्टान्त तर्क को सशक्त और स्पष्ट बनाता है।
  2. यह साध्य (सिद्ध होने योग्य तथ्य) और उसके कारण (हेतु) के बीच संबंध को समझने में मदद करता है।
  3. तर्क में समान गुण वाले दृष्टांत का उपयोग न्यायशास्त्र की तार्किकता और वैज्ञानिकता को बढ़ाता है।

सारांश:

"साध्यसाधर्म्यात्तद्धर्मभावी दृष्टान्त उदाहरणम्" का अर्थ है:

"साध्य के समान धर्म रखने वाला दृष्टांत, जो तर्क में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।"

यह तर्क प्रक्रिया में साध्य और साधर्म्य के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।