Sbg 11.51 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.51।।अर्जुन बोला -- हे जनार्दन अब मैं अपने मित्रकी आकृतिमें आपके इस प्रसन्नमुख सौम्य मानुषरूपको देखकर सचेता यानी प्रसन्नचित्त हुआ हूँ और अपनी प्रकृतिको -- वास्तविक स्थितिको प्राप्त हुआ हूँ।
,