Sbg 11.49 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.49।।जैसा पहले दिखाया जा चुका है? वैसे मेरे इस घोर रूपको देखकर तुझे भय न होना चाहिये और विमूढभाव अर्थात् चित्तकी मूढावस्था भी नहीं होनी चाहिये। तू भयरहित और प्रसन्नमन हुआ वही अपना इष्ट यह शङ्खचक्रगदाधारी चतुर्भुजरूप फिर भी देख।
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