Sbg 11.47 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.47।।अर्जुनको भयभीत देखकर? विश्वरूपका उपसंहार करके प्रिय वचनोंसे धैर्य देते हुए श्रीभगवान् बोले --, हे अर्जुन प्रसन्न हुए मुझ परमात्माने -- तुझपर जो अनुग्रहबुद्धि है उसका नाम प्रसाद है उससे युक्त मुझ परमेश्वरने -- अपने ऐश्वर्यकी सामर्थ्यसे यह परम श्रेष्ठ तेजोमय -- तेजसे परिपूर्ण अनन्त -- अन्तरहित सबसे पहले होनेवाला अनादि विश्वरूप तुझे दिखाया है? जो मेरा रूप तेरे सिवा पहले और किसीसे भी नहीं देखा गया।