Sbg 11.45 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.45।।आपके जिस विश्वरूपको मैंने या अन्य किसीने पहले कभी नहीं देखा? ऐसे पहले न देखे हुए इस रूपको देखकर मैं हर्षित हो रहा हूँ। तथा साथ ही मेरा मन भयसे व्याकुल भी हो रहा है। इसलिये हे देव मुझे अपना वही रूप दिखलाइये जो मेरा मित्ररूप है। हे देवेश हे जगन्निवास आप प्रसन्न होइये। जगत्के निवासस्थानका नाम जगन्निवास है।