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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.44।।जब कि यह बात है --, इसीलिये मैं अपने शरीरको भली प्रकार नीचा करके अर्थात् आपके चरणोंमें रखकर प्रणाम करके स्तुति करनेयोग्य शासनकर्ता आप ईश्वरको प्रसन्न करता हूँ। अर्थात् आपसे अनुग्रह कराता हूँ। जैसे पुत्रका समस्त अपराध पिता क्षमा करता है तथा जैसे मित्रका अपराध मित्र अथवा प्रियाका अपराध प्रिय ( पति ) क्षमा करता है -- सहन करता है? वैसे ही हे देव आपको भी ( मेरे समस्त अपराधोंको सर्वथा ) सहन करना अर्थात् क्षमा करना उचित है।