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यत्सिद्धावन्यप्रकरणसिद्धिः सोऽधिकरणसिद्धान्तः 1/1/30


संधि विच्छेद:

  1. यत् + सिद्धा + अन्य + प्रकरण + सिद्धिः + सोऽधिकरण + सिद्धान्तः
    • यत्: जो, जिसका।
    • सिद्धा: सिद्ध, प्रमाणित।
    • अन्य: अन्य, अलग।
    • प्रकरण: प्रकरण, संदर्भ, उदाहरण।
    • सिद्धिः: सिद्धि, सफलता, समाधान।
    • सो: वह (सः)।
    • अधिकारण: प्रमाण, साधन, स्थिति।
    • सिद्धान्तः: सिद्धांत, निष्कर्ष, विचारधारा।

अर्थ:

यह श्लोक कहता है:

जो सिद्धि किसी अन्य प्रकरण से सिद्ध होती है, वही सिद्धांत उस विशेष स्थिति का (अधिकारण का) सिद्धांत कहलाता है।

अर्थात, यदि किसी सिद्धि (समाधान या प्रमाण) को किसी दूसरे प्रकरण या संदर्भ से प्रमाणित किया जाता है, तो वह सिद्धांत उस संदर्भ का सिद्धांत बन जाता है।


व्याख्या:

  1. यत्सिद्धाव:
    • यह शब्द "यत्सिद्ध" से लिया गया है, जिसका अर्थ है "जो सिद्ध है" या "जिसे प्रमाणित किया गया है"।
    • यहाँ यह दर्शाया जा रहा है कि किसी विशेष सिद्धि (समाधान) का प्रमाण दूसरे प्रकरण या उदाहरण से लिया जाता है।
  2. अन्यप्रकरणसिद्धिः:
    • अन्य प्रकरण का अर्थ है "दूसरा उदाहरण" या "दूसरी स्थिति"।
    • सिद्धिः का अर्थ है "सिद्धि", अर्थात समाधान या प्रमाण।
    • यह इस बात को व्यक्त करता है कि एक सिद्धि (समाधान) को दूसरे उदाहरण या प्रकरण से सिद्ध किया जाता है।
  3. सोऽधिकरणसिद्धान्तः:
    • अधिकरण का अर्थ है "प्रमाण" या "साधन", जो किसी सिद्धि के प्रमाणिकरण के लिए जिम्मेदार होता है।
    • सिद्धान्त का अर्थ है "सिद्धांत" या "निष्कर्ष", जो उस विशेष प्रमाण या साधन से प्राप्त होता है।
    • इस प्रकार, यह भाग यह कहता है कि जो सिद्धि दूसरे उदाहरण से प्रमाणित होती है, वह उसी उदाहरण के सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करती है।

तात्पर्य:

  1. सिद्धि का प्रमाण:
    • यह श्लोक यह दर्शाता है कि जब कोई सिद्धि (समाधान या निष्कर्ष) किसी अन्य प्रकरण (उदाहरण या संदर्भ) से प्रमाणित होती है, तो वह उस प्रकरण का सिद्धांत बन जाता है।
    • इसका मतलब यह है कि एक सिद्धि, जो किसी अन्य उदाहरण से प्रमाणित होती है, उसी सिद्धांत का हिस्सा बन जाती है।
  2. अधिकारण और सिद्धांत का संबंध:
    • यह श्लोक यह भी इंगीत करता है कि सिद्धि को प्रमाणित करने के लिए किसी अन्य प्रकरण या संदर्भ का उपयोग किया जाता है, और उसी से वह सिद्धांत स्थापित होता है।
    • किसी सिद्धांत का निर्माण दूसरे उदाहरण या प्रकरण के आधार पर होता है, जो उस सिद्धांत का आधार बनता है।

उदाहरण:

  1. विज्ञान में प्रयोग:
    • जब वैज्ञानिक प्रयोग किसी सिद्धांत को सिद्ध करते हैं, तो वह प्रयोग उस सिद्धांत का प्रमाण बन जाता है।
    • उदाहरण के लिए, यदि किसी भौतिकी के सिद्धांत को किसी प्रयोग के माध्यम से सिद्ध किया जाता है, तो वह प्रयोग उस सिद्धांत का प्रमाण और अधिकारण बन जाता है।
  2. दर्शन और तर्क:
    • यदि किसी तर्क को किसी अन्य दृष्टिकोण या प्रकरण से सिद्ध किया जाता है, तो वह तर्क उस दृष्टिकोण का सिद्धांत बन सकता है।
    • उदाहरण के लिए, यदि किसी दर्शनिक विचारधारा को किसी अन्य संस्कृति या धर्म के विचारों से सिद्ध किया जाता है, तो वह विचारधारा उसी संस्कृति या धर्म के सिद्धांत से मेल खाती है।

निष्कर्ष:

यत्सिद्धावन्यप्रकरणसिद्धिः सोऽधिकरणसिद्धान्तः श्लोक यह बताता है कि यदि कोई सिद्धि (समाधान या निष्कर्ष) किसी अन्य प्रकरण या उदाहरण से प्रमाणित होती है, तो वही सिद्धांत उस प्रकरण या उदाहरण का सिद्धांत बन जाता है। इस प्रकार, सिद्धि का प्रमाण और सिद्धांत दूसरे उदाहरण या प्रकरण के आधार पर स्थापित होता है।