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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.43।।क्योंकि आप --, इस स्थावरजंगमरूप समस्त जगत्के यानी प्राणिमात्रके उत्पन्न करनेवाले पिता हैं। केवल पिता ही नहीं? आप पूजनीय भी हैं? क्योंकि आप बड़ेसेबड़े गुरु हैं। आप कैसे गुरुतर हैं सो ( अर्जुन ) बतलाता है -- हे अप्रतिमप्रभाव सारी त्रिलोकीमें आपके समान दूसरा कोई नहीं है क्योंकि अनेक ईश्वर मान लेनेपर व्यवहार सिद्ध नहीं हो सकता। इसलिये ईश्वर दो नहीं हो सकते। जब कि सारे त्रिभुवनमें आपके समान ही दूसरा कोई नहीं है? फिर अधिक तो कोई हो ही कैसे सकता है जिससे किसी वस्तुकी समानता की जाय उसका नाम प्रतिमा है? जिन आपके प्रभावकी कोई प्रतिमा नहीं है? वह आप अप्रतिमप्रभाव हैं। इस प्रकार हे अप्रतिमप्रभाव अर्थात् हे निरतिशयप्रभाव ।
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