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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.42।।तथा जो हँसीके लिये भी आप मुझसे असत्कृत -- अपमानित हुए हैं कहाँ विहार? शय्या? आसन और भोजनादिमें। विचरनारूप पैरोंसे चलनेफिरनेकी क्रियाका नाम विहार है? शयनका नाम शय्या है? स्थित होनेबैठनेका नाम आसन है और भक्षण करनेका नाम भोजन है। इन सब क्रियाओंके करते समय ( मुझसे ) अकेलेमें -- आपके पीछे अथवा आपके सामने आपका जो कुछ अपमान -- तिरस्कार हुआ है हे अच्युत उस समस्त अपराधोंके समुदायको मैं आप अप्रमेयसे अर्थात् प्रमाणातीत परमेश्वरसे क्षमा कराता हूँ। समक्षम् शब्दके पहलेका तत् शब्द क्रियाविशेषण है।
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