Sbg 11.40 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.40।।तथा --, आपको आगसे अर्थात् पूर्वदिशामें और पीछेसे भी नमस्कार है। हे सर्वरूप आपको सब ओरसे नमस्कार है अर्थात् सर्वत्र स्थित हुए आपको सब दिशाओंमें नमस्कार है। आप अनन्तवीर्य और अपार पराक्रमवाले हैं। वीर्य सामर्थ्यको कहते हैं और विक्रम पराक्रमको। कोई व्यक्ति सामर्थ्यवान् होकर भी शस्त्रादि चलानेमें पराक्रम नहीं दिखा सकता? अथवा मन्दपराक्रमी होता है। परन्तु आप तो अनन्तवीर्य और अमित पराक्रमसे युक्त हैं। इसलिये आप अनन्तवीर्य और अमितपराक्रमी हैं। आप अपने एक स्वरूपसे सारे जगत्को व्याप्त किये हुए स्थित हैं? इसलिये आप सर्वरूप हैं? अर्थात् आपसे अतिरिक्त कुछ भी नहीं है।
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