Sbg 11.39 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.39।।तथा --, आप ही वायु? यम? अग्नि? जलके राजा वरुण? चन्द्रमा और कश्यपादि प्रजापति हैं और आप ही पितामहके भी पिता प्रपितामह हैं अर्थात् ब्रह्माके भी पिता हैं। आपको हजारों बार नमस्कार हो? नमस्कार हो फिर भी बारंबार आपको नमस्कार हो? नमस्कार हो। सहस्र शब्दसे कृत्वसुच् प्रत्यय कर देनेसे अनेकोंबार नमस्कार क्रियाके अभ्यास और आवृत्तिकी गणनाका प्रतिपादन हो जाता है परंतु फिर भी पुनश्च भूयोऽपि इन शब्दोंसे अर्जुन अतिशय श्रद्धा और भक्तिके कारण नमस्कार करताकरता मैं तृप्त नहीं हुआ हूँ ऐसा अपना भाव दिखलाता है।
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