Sbg 11.38 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.38।।अर्जुन फिर भी स्तुति करता है --, आप जगत्के रचयिता होनेके कारण आदिदेव हैं और शरीररूप पुरमें रहनेके कारण सनातन पुरुष हैं तथा आप ही इस विश्वके परम उत्तम स्थान हैं अर्थात् महाप्रलयादिमें समस्त जगत् जिसमें स्थित होता है वह ( जगत्का आश्रय ) आप ही हैं। तथा समस्त जाननेयोग्य वस्तुओंके आप जाननेवाले हैं और जो जाननेयोग्य हैं वह भी आप ही हैं। आप ही परम धाम -- परम वैष्णवपद हैं। हे अनन्तरूप समस्त विश्व आपसे परिपूर्ण है -- व्याप्त है। आपके रूपोंका अन्त नहीं है।
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