Sbg 11.35 htshg

From IKS BHU
Revision as of 13:38, 4 December 2025 by imported>Vij (Added {content_identifier} content)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)
Jump to navigation Jump to search

Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.35।।संजय बोला -- केशवके इनउपर्युक्त वचनोंको सुनकर अर्जुन काँपता हुआ हाथ जोड़कर नमस्कार करके फिर श्रीकृष्णसे इस प्रकार गद्गद वाणीसे बोला। जब दुःख प्राप्त होनेके कारण भयभीत पुरुषके और हर्षोत्पत्तिके कारण स्नेहयुक्त पुरुषके नेत्र आँसुओंसे परिपूर्ण हो जाते हैं और कण्ठ कफसे रुक जाता है? उस समय जो वाणीमें अपटुता और शब्दमें मन्दता हो जाती है? उसका नाम गद्गद है? जो उससे युक्थ थे ऐसे सगद्गद वचन बोला। यहाँ सगद्गद शब्द बोलनारूप क्रियाका विशेषण है। इस प्रकार भयभीतभयसे बारंबार विह्वलचित्त हुआ प्रणाम करके अत्यन्त नम्र होकर बोला। यहाँपर संजयके वचन इस गूढ़ अभिप्रायसे भरे हुए हैं कि द्रोणादि चार अजेय शूरवीरोंका अर्जुनके द्वारा नाश हो जानेपर आश्रयरहित दुर्योधन तो मरा हुआ ही है? ऐसा मानकर विजयसे निराश हुआ धृतराष्ट्र सन्धि कर लेगा और उससे दोनों पक्षवालोंकी शान्ति हो जायगी। परंतु भावीके वशमें होकर धृतराष्ट्रने ऐसे वचन भी नहीं सुने।


,