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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.25।।क्योंकि --, दाढ़ोंसे युक्त भयंकर -- विकराल आकृतिवाले और कालाग्निके समान अर्थात् प्रलयकालमें लोकोंको भस्मीभूत करनेवाली जो कालाग्नि है? उसके समान आपके मुखोंको देखकर मैं इन दिशाओंको पूर्व और पश्चिमके विवेकपूर्वक नहीं जानता हूँ अर्थात् मुझे दिग्भ्रम हो गया है। इसीसे ( आपके स्वरूपका दर्शन करते हुए भी ) मुझे विश्राम -- सुख नहीं मिल रहा है? सो हे देवेश हे जगन्निवास आप प्रसन्न होइये।
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