1/1/25

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लौकिकपरीक्षकाणां यस्मिन्नर्थे बुद्धिसाम्यं स दृष्टान्तः 1/1/25


संधि विच्छेद:

  1. लौकिक + परीक्षकाणां + यस्मिन् + अर्थे + बुद्धि + साम्यं + स + दृष्टान्तः
    • लौकिक: सामान्य, संसार से संबंधित।
    • परीक्षकाणां: परीक्षकों की, जांचने वालों की।
    • यस्मिन्: जिसमें।
    • अर्थे: विषय में, अर्थ में।
    • बुद्धि: ज्ञान, समझ।
    • साम्यं: समानता।
    • : वह।
    • दृष्टान्तः: उदाहरण।

अर्थ:

यह श्लोक कहता है:

जिस विषय में सामान्य परीक्षकों (लोगों) की बुद्धि (समझ) समान हो, वही दृष्टान्त (उदाहरण) है।

अर्थात, वह उदाहरण दृष्टान्त कहलाता है, जो किसी सामान्य संदर्भ या विषय में सबकी बुद्धि और समझ को एक समान रूप से संतोषजनक हो।


व्याख्या:

  1. दृष्टान्त की परिभाषा:
    • दृष्टान्त का अर्थ है: ऐसा उदाहरण जो किसी विशेष विषय को स्पष्ट करने के लिए प्रयोग किया जाए।
    • न्याय दर्शन में दृष्टान्त तर्क की एक महत्वपूर्ण विधि है, जिसका उपयोग सत्यापन के लिए किया जाता है।
  2. लौकिक और सामान्य परीक्षक:
    • "लौकिक परीक्षक" का अर्थ है वे लोग जो सामान्य बुद्धि और अनुभव रखते हैं।
    • यदि कोई उदाहरण सभी सामान्य व्यक्तियों को समझ में आता है और उनकी बुद्धि एक समान निर्णय देती है, तो वह दृष्टान्त उपयुक्त माना जाता है।
  3. तार्किक उपयोग:
    • दृष्टान्त का उपयोग किसी तर्क या विचार को स्पष्ट और स्वीकार्य बनाने के लिए किया जाता है।
    • यह तर्क में सत्यता और स्वीकृति सुनिश्चित करता है।
  4. उदाहरण:
    • सामान्य दृष्टान्त:
      • "आग में धुआँ होता है"—यह सभी को सामान्य रूप से स्पष्ट है, इसलिए यह दृष्टान्त है।
    • विशेष संदर्भ:
      • "आकाशगंगा में जीवन है"—यह दृष्टान्त नहीं है, क्योंकि यह सभी परीक्षकों की बुद्धि से समान रूप से स्वीकार्य नहीं है।

प्रयोग और महत्व:

  1. तर्क में:
    • दृष्टान्त से तर्क में शक्ति और स्पष्टता आती है।
    • यह किसी तथ्य को प्रमाणित करने या समझाने में सहायक होता है।
  2. शिक्षा में:
    • शिक्षक दृष्टान्तों का उपयोग कठिन विषयों को सरलता से समझाने के लिए करते हैं।
  3. सामाजिक और व्यावहारिक जीवन में:
    • दृष्टान्त संवाद और बातचीत को प्रभावी बनाते हैं।

निष्कर्ष:

लौकिकपरीक्षकाणां यस्मिन्नर्थे बुद्धिसाम्यं स दृष्टान्तः यह बताता है कि दृष्टान्त वही उपयुक्त है, जिसे सभी सामान्य लोग समान रूप से समझें और स्वीकार करें। यह न्याय दर्शन में तर्क और प्रमाण की प्रक्रिया को सशक्त और स्पष्ट बनाने का साधन है।