Sbg 11.20 htshg
Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.20।।एकमात्र आप विश्वरूपधारी परमेश्वरसे ही यह स्वर्ग और पृथिवीके बीचका सारा आकाश और समस्त दिशाएँ भी परिपूर्ण हो रही हैं। हे महात्मन् अर्थात् हे अक्षुद्र स्वभाववाले कृष्ण आपके इस अद्भुत -- आश्चर्यजनक? भयंकर -- क्रूर रूपको देखकर तीनों लोक व्यथित हो रहे हैं अर्थात् भयभीत या विचलित हो रहे हैं।
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