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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.18।।इसीलिये अर्थात् आपकी योगशक्तिको देखकर ही मैं अनुमान करता हूँ --, आप मुमुक्षु पुरुषोंद्वारा जाननेयोग्य परमअक्षर अर्थात् जिसका कभी नाश न हो ऐसे परमब्रह्म परमात्मा हैं। आप ही इस समस्त जगत्के परम उत्तम निधान हैं -- जिसमें कोई वस्तु रक्खी जाय उसे निधान कहते हैं? सो आप इस संसारके परम आश्रय हैं। इसके सिवा आप अविनाशी हैं अर्थात् आपका कभी नाश नहीं होता? इसलिये आप नाशरहित हैं और सनातनधर्मके रक्षक हैं अर्थात् जो सदासे है? ऐसे नित्यधर्मके आप रक्षक हैं और आप ही सनातन परमपुरुष हैं -- यह मेरा मत है।