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Hindi Commentary By Swami Chinmayananda ।।11.14।। इस सर्वोत्कृष्ट भव्य दृश्य को देखकर अर्जुन के मन में विस्मय की भावना और शरीर पर हो रहे रोमांच स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। यद्यपि संजय घटनास्थल से दूर है? फिर भी अपनी दिव्य दृष्टि से न केवल समस्त योद्धाओं के शरीर ही? वरन् उनकी मनस्थिति को भी जानने में सक्षम प्रतीत होता है। अर्जुन की विस्मय की भावना उसे उतनी ही स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रही है? जितने कि उसके रोमांच। शिर से प्रणाम करते हुये दोनों हाथ जोड़कर अर्जुन कुछ कहने के लिए अपना मुख खोलता है। अब तक अर्जुन कुछ नहीं बोला था? जो उसके कण्ठावरोध का स्पष्ट सूचक है। प्रथम बार जब उसने उस दृश्य को देखा? जो मधुरतापूर्वक साहस तोड़ने वाला प्रतीत होता था? तब भावावेश के कारण अर्जुन का कण्ठ अवरुद्ध हो गया था।