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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।11.14।।फिर? उसको देखकर वह धनंजय आश्चर्ययुक्त और प्रफुल्लित रोमवाला हो गया अर्थात् उसके रोंगटे खड़े हो गये? फिर वह विश्वरूपधारी परमात्मदेवको शिरसे प्रणाम करके अर्थात् नम्रतापूर्वक भली प्रकार नमस्कार करके पुनः नमस्कारके लिये हाथ जोड़कर बोला।
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