Sbg 10.26 hcrskd

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Hindi Commentary By Swami Ramsukhdas ।।10.26।। व्याख्या-- 'अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्'-- पीपल एक सौम्य वृक्ष है। इसके नीचे हरेक पेड़ लग जाता है, और यह पहाड़, मकानकी दीवार, छत आदि कठोर जगहपर भी पैदा हो जाता है। पीपल वृक्षके पूजनकी बड़ी महिमा है। आयुर्वेदमें बहुत-से रोगोंका नाश करनेकी शक्ति पीपल वृक्षमें बतायी गयी है। इन सब दृष्टियोंसे भगवान्ने पीपलको अपनी विभूति बताया है। 'देवर्षीणां च नारदः'-- देवर्षि भी कई हैं और नारद भी कई हैं; पर 'देवर्षि नारद' एक ही हैं। ये भगवान्के मनके अनुसार चलते हैं और भगवान्को जैसी लीला करनी होती है? ये पहलेसे ही वैसी भूमिका तैयार कर देते हैं। इसलिये नारदजीको भगवान्का मन कहा गया है। ये सदा वीणा लेकर भगवान्के गुण गाते हुए घूमते रहते हैं। वाल्मीकि और व्यासजीको उपदेश देकर उनको रामायण और भागवत-जैसे ग्रन्थोंके लेखन-कार्यमें प्रवृत्त करानेवाले भी नारदजी ही हैं। नारदजीकी बातपर मनुष्य, देवता, असुर, नाग आदि सभी विश्वास करते हैं। सभी इनकी बात मानते हैं और इनसे सलाह लेते हैं। महाभारत आदि ग्रन्थोंमें इनके अनेक गुणोंका वर्णन किया गया है। यहाँ भगवान्ने इनको अपनी विभूति बताया है। 'गन्धर्वाणां चित्ररथः'-- स्वर्गके गायकोंको गन्धर्व कहते हैं और उन सभी गन्धर्वोंमें चित्ररथ मुख्य हैं। अर्जुनके साथ इनकी मित्रता रही और इनसे ही अर्जुनने गानविद्या सीखी थी। गानविद्यामें अत्यन्त निपुण और गन्धर्वोंमें मुख्य होनेसे भगवान्ने इनको अपनी विभूति बताया है। 'सिद्धानां कपिलो मुनिः'-- सिद्ध दो तरहके होते हैं--एक तो साधन करके सिद्ध बनते हैं और दूसरे जन्मजात सिद्ध होते हैं। कपिलजी जन्मजात सिद्ध हैं और इनको आदिसिद्ध कहा जाता है। ये कर्दमजीके यहाँ देवहूतिके गर्भसे प्रकट हुए थे। ये सांख्यके आचार्य और सम्पूर्ण सिद्धोंके गणाधीश हैं। इसलिये भगवान्ने इनको अपनी विभूति बताया है।इन सब विभूतियोंमें जो विलक्षणता प्रतीत होती है, वह मूलतः, तत्त्वतः भगवान्की ही है। अतः साधककी,दृष्टि भगवान्में ही रहनी चाहिये।