Sbg 10.20 htshg

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Hindi Translation Of Sri Shankaracharya's Sanskrit Commentary By Sri Harikrishnadas Goenka ।।10.20।।उनमें तू पहली विभूतिको ही सुन --, गुडाका -- निद्रा उसका स्वामी यानी निद्राजयी होनेके कारण अथवा घनकेश होनेके कारण अर्जुनका नाम गुडाकेश है। हे गुडाकेश समस्त भूतोंके आशयमें यानी आन्तरिक हृदयदेशमें स्थित सबका अन्तरात्मा मैं हूँ ( ऊँचे अधिकारियोंको तो ) मेरा ध्यान सदा इस प्रकार करना चाहिये। परंतु जो ऐसा ध्यान करनेमें असमर्थ हों उन्हें आगे कहे हुए भावोंमें मेरा चिन्तन करना चाहिये? अर्थात् उनके द्वारा ( इन अगले भावोंमें ) मेरा चिन्तन किया जा सकता है क्योंकि मैं ही सब भूतोंका आदि? मध्य और अन्त हूँ अर्थात् उनकी उत्पत्ति? स्थिति और प्रलयरूप मैं ही हूँ।